इन बीमारियों से बचाते है तुल्सी के पत्ते

 दोस्तों तुल्सी को भारत मे पौधे से बढ़कर माना गया है, पहले के टीम मे तो किसी के घर मे कोई और पौधा हो न हो लेकिन तुल्सी का पौधा जरूर होता था, कभी आपने सोचा हैं ऐसा क्यों? 

एक कारण तो साफ है की तुल्सी के औषधीय गुड़ आम पौधों के मुकाबले बहुत ज्यादा है, infact एक study मे तो तुल्सी को 'A herb of all reasons' का दर्जा दिया गया है, ये तो हम सभी जानते है की तुल्सी हमारे 'इम्युनिटि' को बढ़ाती है तभी तो जब व सर्दी, खासी और जुकाम होता था तो हमारी मम्मी तुल्सी के पत्तो का काढा बना कर देती थी। लेकिन तुल्सी सिर्फ इम्युनिटि तक समिति नही है! तुल्सी का पौधा सुगर और हाई ब्लड प्रेशर वालो के घर मे तो जरूर होना चाहिए। 

इस्तेमाल 



इस्तेमाल कैसे करना है? वही पत्तों को तोड़कर काढा बना लो सुबह खाली पेट पी लो या फिर दो- चार पत्ते पानी के साथ निगल लो। 
दोस्तों तुल्सी एक बहुत ही 'सात्विक' पौधा है जिसका सेवन करने से आपके मन मे अपने - आप positive विचार आते है शायद इसीलिए अध्यात्म मे इसे माना गया है। 
तुल्सी के पत्तो को चबाना नही होता direct निगल सकते है वो इसलिए क्युकी तुल्सी मे naturally मर्करी पाया जाता है जो चबाने से अगर कही दातों मे रह गया तो कीड़ा लग सकता है, दोस्तों मर्करी एक जहरीली धातु है लेकिन तुल्सी मे बहुत कम quantity मे होती है इसलिए अमृत का काम करती है, बस चबाये नहीं| तुल्सी को दूध वाले चाय मे भी नही डालना चाहिए आयुर्वेद के हिसाब से दूध और चाय का combination सही नही है, हा दही मे डाल सकते है। 

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